Wednesday, June 07, 2006

 
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चार वेद- ऋग्वेद, यर्जुवेद, सामवेद, अथर्ववेद ।

दस उपनिषद्- ईश, कठ, केन, प्रश्‍न, मुण्डक, मांडूक्य, तैतरीय,
ऐतरय, छान्दोग्य, वृहदारण्यक ।

बीस स्मृतियां- मनु, गौतम, औशनस, वशिष्ठ, शातातप, आंगिरस, यम, लिखित, काव्यायन, विष्णु, याज्ञवल्क्य, पाराशर, लम्वर्त, दक्ष, वेदव्यास, आपस्तम्ब, हारीत,शंख, अत्रि ।

अठारह पुराण- मत्स्य, मार्कण्डेय, भविष्य, भागवत, ब्रहमांड,
ब्रहमवैवर्त, ब्राहम,वामन, वराह, विष्णु , वायु , अग्नि, नारद,
पद्म, लिंग, गरूड़, कूर्म, स्कन्ध।

षड् दर्शन- सांख्य, योग, मीमांसा, न्याय, वेदान्त, वैशिषक।

चार आश्रम- ब्रहमचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ, संन्यास।

चार वर्ण- ब्राहमण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र।

नौ ग्रह- रवि, चन्द्रमा, मंगल, बुद्ध, बृहस्पति,
शुक्र, शनि, राहू, केतू ।

भारतीय संस्कृति ही हिन्‍दूधर्म या सनातन धर्म है। वर्तमानयुग में इन संस्कृति-स्तम्भों की अवहेलना की जा रही हैं। इनकी रक्षा से ही भारतीय संस्कृति को बचाया जा सकता है। इन मूल स्तम्भों के आश्रित होकर ही मानव धर्म-रहस्य, आचार, व्यवहार एवं वर्णाश्रम-धर्मो तथा कर्तव्यों की शिक्षा हमें प्राप्त होती है। अत: हमारा कर्तव्य है कि अपनी संस्कृति की रक्षा करें। ताकि धरती पर सुख शान्ति बनी रहे। प्रभु सबका कल्याण करें। ॐ शान्ति ॐ।








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